दिल को उतनी ही गरम लगती है।
वो पीछे ही रहेंगे, हम आगे ही रहेंगे।
हमारा काम ही हमारी पहचान है।
आईना हर किसी को सच नहीं दिखाता।
भीड़ के पीछे चलना हमें आता नहीं।
और उस चुप में उम्र गुज़र जाती है।
आँखों को समझाना अब भी नहीं आया।
आज उसी से बात नहीं होती।
लफ़्ज़ बस पास बैठे सुनते रहे।
उसी को लोग मोहब्बत कहते हैं।
हर दुआ के आख़िर में लब पर आ जाता है।
किसी की बातें अभी अधूरी हैं।
कभी धूप, कभी बारिश, कभी बस नमी सी।